मैनपाट में सियासी संग्राम: अमरजीत भगत बोले “वो विधायक नहीं, बंदर है” — टोप्पो का पलटवार, “मैं बेटियों का रखवाला हूँ”

मैनपाट (सरगुजा), छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी का बारूद फट पड़ा है। कांग्रेस के एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन में पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक अमरजीत भगत के बयान ने पूरे सरगुजा की सियासत में भूचाल ला दिया है।
धरना मंच पर बोलते हुए अमरजीत भगत ने कहा —
“वो विधायक नहीं, बंदर है! कभी नान चाकू चलाता है, तो कभी पुलिया के ऊपर टरकाता है। बदर जैसा टरकाने से कुछ नहीं होता, जनता की समस्या सुनो! गलती से जीत गया है, इसे राजनीति थोड़ी आती है।”
उनके इस बयान के बाद सभा में कुछ पल के लिए खामोशी छा गई। भीड़ में कुछ लोगों ने हँसकर टाल दिया, तो कई लोग भड़क उठे।
कुछ ही देर में यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और देखते-देखते सरगुजा की सियासत में बवाल मच गया।
रामकुमार टोप्पो का पलटवार: “मैं बंदर नहीं, बेटियों का रखवाला हूँ”
भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो ने कड़ा जवाब देते हुए कहा
> “अगर मैं अपनी बेटियों को आत्मरक्षा के लिए नान चाकू चलाना सिखा रहा हूँ, तो इसमें गलत क्या है? बेटियों की सुरक्षा मेरी प्राथमिकता है। राजनीति का मज़ाक उड़ाना समाज की सच्चाई से भागना है।”
टोप्पो ने आगे कहा —
“मैं जनता की आवाज़ सुनता हूँ, पुलिया पर टरकाने नहीं जाता। मेरी राजनीति सेवा की है, शोहरत की नहीं। जिन्होंने जनता का विश्वास खो दिया है, वही अब मंच पर शब्दों से नाच रहे हैं।
जनता में गुस्सा और बहस
अमरजीत भगत के इस बयान से जनता के बीच गहरी नाराज़गी देखने को मिली।
गाँव-गाँव, चौपालों और बाज़ारों में चर्चा है —
> “जनता के चुने हुए प्रतिनिधि को बंदर कहना क्या लोकतंत्र का अपमान नहीं?”
महिलाओं ने भी आवाज़ उठाई —
> “जो नेता बेटियों को आत्मरक्षा सिखा रहा है, उसका मज़ाक उड़ाना शर्मनाक है। ऐसे बयान समाज को पीछे धकेलते हैं।”
वहीं कुछ कांग्रेस समर्थकों ने बचाव करते हुए कहा —
> “अमरजीत भगत ने प्रतीकात्मक बात कही है, विधायक जनता से दूर हैं।”
अब जनता के मन में सवाल: कौन सच्चा जनसेवक?
मैनपाट की धरती से उठी यह सियासी आग अब पूरे सरगुजा में फैल चुकी है।
एक ओर अमरजीत भगत का तीखा तंज,
दूसरी ओर रामकुमार टोप्पो की जनता-केन्द्रित छवि —
अब फैसला जनता के दिल में होना है कि सच्चा जनसेवक कौन?




